नोबल पुरस्कार
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नोबल पुरस्कार की स्थापना -
स्वीडेन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल ने 1901 में किया था. अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 1833 में स्वीडेन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था. वो एक अविवाहित स्वीडिश
वैज्ञानिक और केमिकल इंजिनियर थे. उन्होंने
34 साल की उम्र में 1867 में डायनमाईट की अविष्कार
किया. 29 साल बाद 1896 में 63 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई.
अर्थशास्त्र
के लिए नोबल पुरस्कार स्वेजेरिश रिक्स बैंक स्वीडिश बैंक
द्वारा अपनी
300 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 1967 में
(डायनामाईट के अविष्कार के सौ वर्ष पूर्ण होने पर) आरम्भ किया गया और 1969
में पहली बार प्रदान किया गया. इसे अर्थशास्त्र में
नोबल स्मृति पुरस्कार भी कहते हैं.
उन
भारतीयों के लिस्ट जिसने नोबल पुरस्कार पाया है.
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नाम
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वर्ष
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विषय
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याद रखने का ट्रिक
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रविन्द्र नाथ टैगोर
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1913
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गीतांजली के लिए साहित्य का नोबल पुरस्कार
(गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद अंग्रेज कवि यीट्स
ने किया और प्रस्तावना लिखा था 1910 में.)
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सबसे पहले अंग्रेज यीट्स ने ने 1910 में टैगोर की रचना गीतांजली का
अनुवाद किया जिससे 1913 में टैगोर को नोबल अवार्ड मिला.
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सी.वी. रमण
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1930
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रमन प्रभाव की खोज के
लिए भौतिकी का नोबल पुरस्कार
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दुसरा
पुरस्कार राम के नाम पर मिला रमन को 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के
समय.
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डॉ. हरगोविंद खुराना
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1968
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कृत्रिम
जीन के संश्लेषण के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में
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तीसरा
पुरस्कार आजादी के 21 साल बाद डॉ. साहब खुराना जी को मिला कृत्रिम जीं का संश्लेष्ण करने के लिए.
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मदर टेरेसा
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1979
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समाज सेवा के लिए शांति का नोबल पुरस्कार
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चौथा
पुरस्कार मिला माता जी को यानि मदर टेरेसा को . वो भी शान्ति बहन के लिए
1979 में जब मैं एक वर्ष का था.
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सुब्रमह्यम चंद्रशेखर
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1983
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चंद्रशेखर
सीमा की खोज के लिए भौतिकी पुरस्कार
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मेरे जन्म
के 5 साल बाद 1983 में पांचवां
नोबल अवार्ड मिला शेखर कपूर को को, क्यों कि उसने तारे की आयुकाल से सम्बंधित
सिद्धांत की खोज किया था, इसलिए भौतिकी
में मिला.
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अमर्त्य सेन
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1998
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कल्याणकारी
अर्थशास्त्र के लिए अर्थशास्त्र का पुरस्कार
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जब मैं 20
वर्ष का हुआ तब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार
मिला, मेरे होश में यही पहला नोबल पुरस्कार था.
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वी.एस. नायपाल
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2001
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साहित्य का
नोबल पुरस्कार
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नई सदी आते
ही वर्ष 2001 में भारत का नाम रोशन कर दिया नायपाल
जी ने जब उन्होंने साहित्य का नोबल अवार्ड जीता.
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वेंकटरामन रामकृष्ण
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2009
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प्रोटीन का
निर्माण करने वाले राइबोसोम की संरचना और कार्य प्रणाली की खोज के लिए USA के थॉमस ई स्टेज और
इजराइल की अदा ई योनथ के साथ संयुक्त रूप से रसायन
का नोबल पुरस्कार मिला
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जब मैं
2000 वर्ष का दशक आखिरी साल में था यानी 2009 में तब राम और कृष्ण भगवान् के
भक्त वेंकटरामन रामकृष्ण ने 2 अन्य मित्र एक अमेरिका और एक इजरायली के साथ मिल कर रसायन के क्षेत्र में नोबल जीता, जिसमे उन्होंने
प्रोटीन का निरामं करने वाले राइबोसोम की संरचना की खोज की थी.
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कैलाश सत्यार्थी
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2014
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शान्ति के
लिए पाकिस्तान की युसूफ मलाला के साथ नोबल पुरस्कार
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मोदी सरकार
बनते ही 2014 में भारत को एक और नोबल अवार्ड कैलाश बाबु के
जरिये भारत को मिला शांति के लिए.
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1. 13 में रविन्द्र (साहित्य)
2. 30 में राम के नाम पर रामन को
(भौतिकी) (रघु रामन 2.0)
3. 68 में तीसरा अवार्ड गोविन्द के नाम
पर हरगोविंद को (चिक्तिसा) (गोविंदा को )
4. 79 में (जब मैं एक साल का था ) चौथा
अवार्ड मदर टेरेसा को शांति (मदर इंडिया)
5. 83 में (जब मैं पांच साल का था)
पांचवा अवार्ड मिल शेखर कपूर को
6. 98 में अमर्त्य सेन
7. 2001 में नायपाल (नए शताब्दी में नया
पाल) साहित्य
8. 2009 में वेंकट रमण को रसायन के
प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम का संश्लेषण करने में.
9. 2014 में कैलाश सत्यार्थी
अब
तक 9 भारतीय को नोबल मिल चुका है. नोबल - नौ बल यानी नौ व्यक्ति को
(भारत के ) नोबल मिला है.
नोबल
पुरस्कार के भारतीय विजेता का नाम याद रखने का आसान ट्रिक -
रविन्द्र राम को डाक्टर खुराना के पास ले गई माता जी , माता जी के जाने के 4
साल बाद शेखर कपूर आये और अमृत पी गए. यह देख गायपाल ने वेंकट को सत्य बता दिया.
Tagore - 1913, C.V. Raman - 1930, Dr. Khurana - 1968,
Teresa - 1979, S. Chandrashekhar - 1983, Amartya Sen - 1998, Naypal - 2001,
Venkat Raman - 2009, Kailash - 2014
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पुरस्कार
का वितरण 10 दिसम्बर को किया जाता है नोबल
के पुन्तिथि पर.
एक
विषय में एक साल में अधिकतम तीन आदमी को अवार्ड
मिलता है.
अब
तक सिर्फ दो इंसान को मरने के बाद यह आवर्ड
दिया गया है. पहली बार 1931 में एरी एक्सेल
कार्लफ्ल्दत (जो
काल के गाल में समा गए) और दूसरी बार 1961 में. UN के पूर्व महासचिव
डैग हैमरसोल्ड (डॉग
को मरने के बाद मिला) को
जो स्वीडन के ही थे.
दो
बार नोबल पाने वाले व्यक्ति
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नाम
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वर्ष
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याद रखने का ट्रिक
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मैडम क्युरी
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1903 में रेडियो सक्रियता की खोज के लिए भौतिकी का और आठ साल बाद 1911 में शुद्ध रेडियम रसायन के निष्कर्षण के लिए
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मैडम क्युरी को दो
बार भौतिकी के लिए ही मिला . एक बार रेडियो के लिए दुरी बार रेडियम के लिए.
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लीनस पॉलिंग
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1954 में हाइब्रिडडाइज्ड कक्षीय सिद्धांत में रसायन के लिए और 1962 में नाभिकीय परिक्षण निषेध संधि
एक्टिविज्म (शांति) के लिए
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पोलिंग अफसर को एक बार 54 में रसायन के लिए
और आठ साल बाद दूसरी बार 62 में शांति के लिए.
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जॉन बरडीन
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1956 में ट्रांजिस्टर के अविष्कार के लिए , 1972 में अतिचालकता के सिद्धांत के लिए
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जॉन अब्राहम बरडीन ने 56 में ट्रांजिस्टर
बनाया फिर 72 में अतिचालकता का सिद्धांत दिया. इस लिए दोनों
बार भौतिकी में अवार्ड मिला.
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फ्रेडरिक सेंगर
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1958 में इन्सुलिन मोलिक्युल की संरचना (रसायन) के लिए और 1980 में वायरस न्युक्लियोटाइड के
सीक्वेंसिंग (रसायन)
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फ्रेडरिक सिंगर को दो
बार रसायन का अवार्ड मिला
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इस प्रकार अब तक चार
व्यक्तियों को दो बार नोबल अवार्ड मिल चूका है. जो मैडम
से शुरू होती है और पोलिग अफसर से होते जॉन अब्राहम से होते हुए सिंगर पर खत्म
होती है. (मैडम पुलिस जॉन सिंगर)
रेड क्रॉस को तीन बार
मिल चुका है 1917, 1944, 1963 शांति का नोबल
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सबसे
कम उम्र में नोबल मिला है - लारेंस ब्रेग (25 वर्ष) (जिसमे लारी सा अत्याधिक वेग
हो) और सबसे कम उम्र की लड़की - मलाला युसूफ (17 वर्ष)
सबसे
अधिक उम्र में नोबल लेने वाले हैं - लियोनिद हरक्विज (90 वर्ष की आयु में), अर्थशास्त्र
के लिए 2007 में (ये महाशय क्विज बहुत पूछते थे, पूछते पूछते बूढ़े हो गए)
द्वितीय
विश्व युद्ध के दौरान 1940 से 1942 तक किसी को नोबल
अवार्ड नहीं मिला.
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