Saturday, 8 December 2018

Indian Nobel Prize Winner


नोबल पुरस्कार
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नोबल पुरस्कार की स्थापना - स्वीडेन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल ने 1901 में किया था. अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 1833 में स्वीडेन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था. वो एक अविवाहित स्वीडिश वैज्ञानिक और केमिकल इंजिनियर थे. उन्होंने 34 साल की उम्र में 1867 में डायनमाईट की अविष्कार किया. 29 साल बाद 1896 में  63 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई. 
अर्थशास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार स्वेजेरिश रिक्स बैंक स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 1967 में (डायनामाईट के अविष्कार के सौ वर्ष पूर्ण होने पर)  आरम्भ किया गया और 1969 में पहली बार प्रदान किया गया. इसे अर्थशास्त्र में नोबल स्मृति पुरस्कार भी कहते हैं.
उन भारतीयों के लिस्ट जिसने नोबल पुरस्कार पाया है.
नाम
वर्ष
विषय
याद रखने का ट्रिक
रविन्द्र नाथ टैगोर
1913
गीतांजली के लिए साहित्य का नोबल पुरस्कार (गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद अंग्रेज कवि यीट्स ने किया और प्रस्तावना लिखा था 1910 में.)
सबसे पहले अंग्रेज यीट्स ने ने 1910 में टैगोर की रचना गीतांजली का अनुवाद किया जिससे 1913 में टैगोर को नोबल अवार्ड मिला.
सी.वी. रमण
1930
रमन प्रभाव की खोज के लिए भौतिकी का नोबल पुरस्कार
दुसरा पुरस्कार राम के नाम पर मिला रमन को 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय.
डॉ. हरगोविंद खुराना
1968
कृत्रिम जीन के संश्लेषण के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में
तीसरा पुरस्कार आजादी के 21 साल बाद डॉ. साहब खुराना जी को मिला कृत्रिम जीं का संश्लेष्ण  करने के लिए.
मदर टेरेसा
1979
समाज सेवा के लिए शांति का नोबल पुरस्कार
चौथा पुरस्कार मिला माता जी को यानि मदर टेरेसा को . वो भी शान्ति बहन के लिए 1979 में जब मैं एक वर्ष का था.
सुब्रमह्यम चंद्रशेखर
1983
चंद्रशेखर सीमा की खोज के लिए भौतिकी पुरस्कार
मेरे जन्म के 5 साल बाद 1983 में  पांचवां नोबल अवार्ड मिला शेखर कपूर को  को, क्यों कि उसने तारे की आयुकाल से सम्बंधित सिद्धांत की खोज किया था, इसलिए भौतिकी में मिला.  
अमर्त्य सेन
1998
कल्याणकारी अर्थशास्त्र के लिए अर्थशास्त्र का पुरस्कार
जब मैं 20 वर्ष का हुआ तब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार मिला, मेरे होश में यही पहला नोबल पुरस्कार था.
वी.एस. नायपाल
2001
साहित्य का नोबल पुरस्कार
नई सदी आते ही वर्ष 2001 में भारत का नाम रोशन कर दिया नायपाल जी ने जब उन्होंने साहित्य का नोबल अवार्ड जीता. 
वेंकटरामन रामकृष्ण
2009
प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम की संरचना और कार्य प्रणाली की खोज के लिए USA के थॉमस ई स्टेज और इजराइल की अदा ई योनथ के साथ संयुक्त रूप से रसायन का नोबल पुरस्कार मिला
जब मैं 2000 वर्ष का दशक आखिरी साल में था यानी 2009 में तब राम और कृष्ण भगवान् के भक्त वेंकटरामन रामकृष्ण ने 2 अन्य मित्र एक अमेरिका और एक इजरायली के साथ मिल कर रसायन के क्षेत्र में नोबल जीता, जिसमे उन्होंने प्रोटीन का निरामं करने वाले राइबोसोम की संरचना की खोज की थी.
कैलाश सत्यार्थी
2014
शान्ति के लिए पाकिस्तान की युसूफ मलाला के साथ नोबल पुरस्कार
मोदी सरकार बनते ही 2014 में भारत को एक और नोबल अवार्ड कैलाश बाबु के जरिये भारत को मिला शांति के लिए. 

1.       13 में रविन्द्र (साहित्य)
2.       30 में राम के नाम पर रामन को (भौतिकी) (रघु रामन 2.0)
3.       68 में तीसरा अवार्ड गोविन्द के नाम पर हरगोविंद को (चिक्तिसा) (गोविंदा को )
4.       79 में (जब मैं एक साल का था ) चौथा अवार्ड मदर टेरेसा को शांति (मदर इंडिया)
5.       83 में (जब मैं पांच साल का था) पांचवा अवार्ड मिल शेखर कपूर को
6.       98 में अमर्त्य सेन
7.       2001 में नायपाल (नए शताब्दी में नया पाल) साहित्य
8.       2009 में वेंकट रमण को रसायन के प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम का संश्लेषण करने में.
9.       2014 में कैलाश सत्यार्थी
अब तक 9 भारतीय को नोबल मिल चुका है. नोबल - नौ बल यानी नौ व्यक्ति को (भारत के ) नोबल मिला है.
नोबल पुरस्कार के भारतीय विजेता का नाम याद रखने का आसान ट्रिक - 
रविन्द्र राम को डाक्टर खुराना  के पास ले गई माता जी , माता जी के जाने के 4 साल बाद शेखर कपूर आये और अमृत पी गए. यह देख गायपाल ने वेंकट को  सत्य बता दिया.
Tagore - 1913, C.V. Raman - 1930, Dr. Khurana - 1968, Teresa - 1979, S. Chandrashekhar - 1983, Amartya Sen - 1998, Naypal - 2001, Venkat Raman - 2009, Kailash - 2014
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पुरस्कार का वितरण 10 दिसम्बर को किया जाता है नोबल के पुन्तिथि पर.
एक विषय में एक साल में अधिकतम तीन आदमी को अवार्ड मिलता है.
अब तक सिर्फ दो इंसान को मरने के बाद यह आवर्ड दिया गया है. पहली बार 1931 में एरी एक्सेल कार्लफ्ल्दत (जो काल के गाल में समा गए) और दूसरी बार 1961 में. UN के पूर्व महासचिव डैग हैमरसोल्ड (डॉग को मरने के बाद मिला) को जो स्वीडन के ही थे.
दो बार नोबल पाने वाले व्यक्ति
नाम
वर्ष
याद रखने का ट्रिक
मैडम क्युरी
1903 में रेडियो सक्रियता की खोज के लिए भौतिकी का और आठ साल बाद 1911 में शुद्ध रेडियम रसायन के निष्कर्षण के लिए
मैडम क्युरी को दो बार भौतिकी के लिए ही मिला . एक बार रेडियो के लिए दुरी बार रेडियम के लिए.
लीनस पॉलिंग
1954 में हाइब्रिडडाइज्ड कक्षीय सिद्धांत में रसायन के लिए और 1962 में नाभिकीय परिक्षण निषेध संधि एक्टिविज्म (शांति) के लिए
पोलिंग अफसर को एक बार 54 में रसायन के लिए और आठ साल बाद दूसरी बार 62 में शांति के लिए.
जॉन बरडीन
1956 में ट्रांजिस्टर के अविष्कार के लिए , 1972 में अतिचालकता के सिद्धांत के लिए
जॉन अब्राहम बरडीन ने 56 में ट्रांजिस्टर बनाया फिर 72 में अतिचालकता का सिद्धांत दिया. इस लिए दोनों बार भौतिकी में अवार्ड मिला.
फ्रेडरिक सेंगर
1958 में इन्सुलिन मोलिक्युल की संरचना (रसायन) के लिए और 1980 में वायरस न्युक्लियोटाइड के सीक्वेंसिंग (रसायन)
फ्रेडरिक सिंगर को दो बार रसायन का अवार्ड मिला
इस प्रकार अब तक चार व्यक्तियों को दो बार नोबल अवार्ड मिल चूका है. जो मैडम से शुरू होती है और पोलिग अफसर से होते जॉन अब्राहम से होते हुए सिंगर पर खत्म होती है. (मैडम पुलिस जॉन सिंगर)
रेड क्रॉस को तीन बार मिल चुका है 1917, 1944, 1963 शांति का नोबल

सबसे कम उम्र में नोबल मिला है - लारेंस ब्रेग (25 वर्ष) (जिसमे लारी सा अत्याधिक वेग हो) और सबसे कम उम्र की लड़की - मलाला युसूफ (17 वर्ष)
सबसे अधिक उम्र में नोबल लेने वाले हैं - लियोनिद हरक्विज (90 वर्ष की आयु में), अर्थशास्त्र के लिए 2007 में (ये महाशय क्विज बहुत पूछते थे, पूछते पूछते बूढ़े हो गए)
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940 से 1942 तक किसी को नोबल अवार्ड नहीं मिला.

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